पंतनगर: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने शुक्रवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित 118वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने छह पुस्तकों का विमोचन किया और प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि किसान राष्ट्र की जीवनधारा हैं — “कृषि केवल आजीविका नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आत्मा और अस्तित्व का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसान को सृष्टि का पोषक कहा गया है, और आज भी देश की लगभग आधी जनसंख्या प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश में कृषि का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व और भी गहरा है। यहां के लोग धरती को मां और बीज को जीवन का प्रतीक मानते हैं। राज्यपाल ने ‘श्री अन्न’ यानी बाजरा, मडुआ, झंगोरा, कौणी, कुटकी और रामदाना जैसी फसलों को पर्वतीय कृषि की धरोहर बताया, जिनमें पोषण, परंपरा और पर्यावरणीय संतुलन निहित है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड शहद उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है, जिससे किसानों की आमदनी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती को भी किसानों की आमदनी बढ़ाने का बड़ा माध्यम बताया।
उन्होंने “ड्रोन दीदी योजना” को महिला सशक्तीकरण की ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि यह न केवल कृषि में तकनीकी क्रांति ला रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है।
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कृषि निर्यात के क्षेत्र में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति बन चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और सांसद अजय भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत 89 देशों को खाद्यान्न निर्यात कर रहा है, जो किसानों और वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम है।
कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मेले में 503 स्टॉल लगाए गए हैं। इस अवसर पर रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा, पूर्व विधायक राजेश, सीजीएम फार्म डॉ. जयंत सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
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